अमरकंटक, मध्य प्रदेश स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) में भगवान शिव की भव्य प्रतिमा की स्थापना की गई। यह ऐतिहासिक क्षण परिसर के छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय के लिए गर्व का विषय बना। भगवान शिव, जिन्हें “महादेव” के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति और धर्म में आदर्श संयम, शक्ति और कृपा के प्रतीक हैं।
शिव प्रतिमा की स्थापना का उद्देश्य विश्वविद्यालय के वातावरण को आध्यात्मिकता और सकारात्मकता से भरना है। भगवान शिव, जिनका निवास कैलाश पर्वत पर माना जाता है, अपने भक्तों को ध्यान, साधना और आत्मा की शांति का संदेश देते हैं। उनकी त्रिनेत्रीय छवि ज्ञान, तप और शक्ति का प्रतीक है, जो सभी को जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देती है।
शिव महिमा का वर्णन वेदों और पुराणों में व्यापक रूप से मिलता है। वे संहार और सृजन दोनों के देवता हैं, जो यह सिखाते हैं कि जीवन में हर अंत एक नए आरंभ का द्वार है। उनका डमरू सृष्टि के अनहद नाद का प्रतीक है, और उनके गले में सर्प जीवन और मृत्यु के चक्र का संकेत देता है।
इस आयोजन में संस्कृतिक कार्यक्रम और मंत्रोच्चार से पूरे परिसर में दिव्यता का वातावरण बना। छात्र-छात्राओं ने इस प्रतिमा को आध्यात्मिकता का प्रतीक बताते हुए इसे अपने अध्ययन और जीवन में प्रेरणा का स्रोत माना।
भगवान शिव की यह प्रतिमा विश्वविद्यालय के लिए न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि एकता, शांति और ज्ञान का संदेश भी प्रसारित करेगी। इस पहल ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय को न केवल शैक्षणिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी एक नई पहचान दी है।




